चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

छत्तीसगढ़ में 11 लोकसभा सीटें हैं जिनमें से सबसे संवेदनशील मानी जानेवाली बस्तर लोकसभा सीट पर चुनाव करवाना एक जंग लड़ने के बराबर माना जाता है. बस्तर के सुदूर इलाक़ों में माओवादी छापामारों की समानांतर सरकार चलती है जो चुनावी प्रक्रिया को ख़ारिज करते हैं. चुनाव में यहां के लोगों के सामने वोट डालना एक बड़ी चुनौती रही है. इस बार यहां से सात प्रत्याशी भाग्य आजमा रहे हैं. बीजेपी से बैदूराम कश्यप, कांग्रेस से दीपक बैज, शिवसेना से सुरेश कवासी, बसपा से आयतूराम मंडावी, सीपीआइ से रामूराम मौर्य और निर्दलीय पनीषप्रसाद नाग और मंगलाराम चुनाव मैदान में हैं. यह पहला मौका है जब बस्तर से चुनाव मैदान में बसपा को छोड़कर बाकी सभी प्रत्याशी पहली बार मैदान में उतरे हैं. 2014 में बस्तर से बीजेपी के दिनेश कश्यप निर्वाचित हुए थे. उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी दीपक कर्मा को हराया था.
2014 में इस सीट से जीत हासिल करने वाले के हर्षवर्धन एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं. 2014 में उन्होंने आम आदमी पार्टी के आशुतोष को हराया था जबकि कांग्रेस के कपिल सिब्बल तीसरे स्थान पर रहे थे. इस बार इस सीट से हर्षवर्धन के सामने आम आदमी पार्टी के पंकज गुप्ता और कांग्रेस के जेपी अग्रवाल चुनावी मैदान में हैं. इस सीट पर 1998 और 1999 में बीजेपी के विजय गोयल जबकि 2004 और 2009 में कांग्रेस के कपिल सिब्बल जीते थे.
2014 में इस सीट पर बीजेपी के मनोज तिवारी ने कांग्रेस के तब के सांसद जेपी अग्रवाल को हराया था. इस बार मनोज तिवारी के सामने तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित हैं. दिल्ली की सातों सीटों में से सबसे कड़ा मुक़ाबला इसी सी
सुंदरगढ़ ओडिशा के 21 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है. सुंदरगढ़ ओडिशा की एकमात्र ऐसी सीट है जिस पर 2014 में बीजेपी के प्रत्याशी की जीत हुई थी. ओडिशा के बाकी सभी सीट बीजेडी की झोली में गयी थीं. तब भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी जुएल उरांव वहां से जीते थे. बीजेपी ने एक बार फिर अपने इस केंद्रीय मंत्री पर दांव खेला है. उनके सामने
तमिलनाडु की शिवगंगा सीट इस बार कई मायनों में खास है. इस सीट पर कार्ति चिदंबरम को उम्मीदवार बनाया गया है. उनके पिता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम यहां से 7 बार सांसद रह चुके हैं. इस बार यहां से कांग्रेस और बीजेपी के साथ ही साथ अभिनेता से नेता बने कमल हासन की पार्टी मक्कल नीधि मय्यम के कविंगनर शेनकन के बीच त्रिकोणीय लड़ाई है.
तमिलनाडु की एकमात्र सीट जहां से 2014 में बीजेपी जीती थी. कांग्रेस ने इस सीट से एच. वसंताकुमार को टिकट दिया है. वहीं बीजेपी ने पोन राधाकृष्णन को ही मैदान में उतारा है. बसपा ने ई. बालासुब्रमण्यम को उम्मीदवार बनाया है तो सीपीएम ने पॉलराज सी.एम को टिकट दिया है.
बीजेपी के केंद्रीय मंत्री सुरेंद्रजीत सिंह अहलूवालिया यहां से चुनाव मैदान में हैं. तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर डॉक्टर ममताज़ संघमिता को चुनाव मैदान में उतारा है. सीपीएम की ओर से अभास राय चौधरी चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस ने रंजीत मुखर्जी को उतारा है तो बहुजन समाज पार्टी की ओर से रामकृष्ण मलिक मैदान में हैं. दुर्गापुर सीट के गठन के बाद पहले चुनाव में ही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने अपना झंडा बुलंद कर दिया, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इस सीट पर जीत हासिल की.
पश्चिम बंगाल में 2014 के चुनाव में बीजेपी जिन दो सीटों को जीती थी उनमें से एक आसनसोल था. इस पर बाबुल सुप्रियो ने टीएमसी के डोला सेन को हराया था. मोदी सरकार में सुप्रियो मंत्री हैं. इस बार उनके सामने ममता बनर्जी ने मुनमुन सेन को उतारा है.
मिदनापुर
पश्चिम बंगाल की मिदनापुर संसदीय सीट पर बीजेपी ने प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को टिकट दिया है. सीपीआई की ओर से बिपल्ब भट्ट और टीएमसी की ओर से मानस रंजन भुइयां चुनाव लड़ रहे हैं. 2014 के चुनाव में यहां पर टीएमसी के दीपक कुमार घोष ने जीत दर्ज की थी.
2014 के चुनाव में बीजेपी की बिजया चक्रवर्ती ने यहां से जीत हासिल की थी. बीजेपी ने इस बार यहां से क्वीन ओझा को खड़ा किया है. वहीं कांग्रेस ने बोबीता शर्मा तो तृणमूल कांग्रेस ने मनोज शर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है.
ट पर माना जा रहा है. माना तो यहां तक जा रहा है कि इस पर आने वाला नतीजा दिल्ली में कांग्रेस और बीजेपी का भविष्य तय करेगी क्योंकि 2020 में यहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.
दक्षिण दिल्ली
इस सीट पर 2014 में बीजेपी के रमेश बिधूड़ी ने कांग्रेस के रमेश कुमार को हराया था. इस सीट से जीत कर भारतीय जनसंघ के बलराज मधोक, अर्जुन सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना, बीजेपी की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज और बीजेपी के विजय कुमार मल्होत्रा संसद जा चुके हैं.
अरुणाचल पश्चिम लोकसभा सीट से जीतकर 2014 में बीजेपी के केंद्रीय मंत्री किरन रिजीजू संसद पहुंचे थे. इस बार उनका मुक़ाबला कांग्रेस से नबाम तुकी (पूर्व मुख्यमंत्री) और पीपीए से सुबु केची के बीच है.

Comments

Popular posts from this blog

معسكر لإعداد المليونيرات يمهد الطريق للأطفال نحو الثراء

مقتل طبيب سوري ذهب إلى الصومال لتحسين وضعه

气候变化当前,低洼城市如何自保?